अब तो आजा सेठ सांवरा,
जी घबरावे रे,
मारी वेल्या में रूस्यो सांवरा,
क्यु तरसावे रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
धन्ना भगत की खेती करबा,
हाली बनकर आयो रे,
भोला भगत के हल चलायो,
खेत भी निपजायो रे,
खेती बाड़ी थोड़ी मारे,
अब तो आजा रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
नामदेव को छपरो छाबा,
आयो मंडासो माड रे,
लछमी जी ने लारा लायो,
दिदो थारो साथ रे,
टुटी टपरी मारे बणाणी,
अब तो आजा रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
कर्मा बाई का खिचडला को,
रूज रूज भोग लगाय रे,
पांचाली की लाज बचाई,
भरी सभा में जाय रे,
मारे है बस थारो सहारो,
बेगो आजा रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
गणा गणा भगता ने तार्या,
किदो अमर नाम रे,
दास देव ने चरण सरण में,
राखो मारा नाथ रे,
दास गरीब की डुबतडी ने,
पार लगा जा रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
अब तो आजा सेठ सांवरा,
जी घबरावे रे,
मारी वेल्या में रूस्यो सांवरा,
क्यु तरसावे रे,
मंडफिया वाला सेठ सांवरा,
बेगो आजा रे।।
लेखक & गायक – देव शर्मा आमा।
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