तुम हो जगत के स्वामी,
ओ मेरे जगन्नाथ,
हम आए गए पूरी में,
ओ मेरे दीनानाथ।।
तर्ज – सावन का महीना।
समय का मैं हूं मारा,
तेरे दर पे आया,
आकर प्रभु जी तेरा,
दरवाजा खटकाया,
तुम हो जब साथ मेरे,
फिर बच्चे क्यों अनाथ,
हम आए गए पूरी में,
ओ मेरे दीनानाथ।।
क्या मैं बताऊं बाबा,
कौन सी घड़ी है,
बच्चो पर तेरे बाबा,
मुश्किल बड़ी है,
सोचू मैं हर बारी,
तुम हो मेरे साथ,
हम आए गए पूरी में,
ओ मेरे दीनानाथ।।
‘लक्की’ को प्रभु मेरे,
पूरी में ही रख लो,
विनती यही है प्रभु,
चरणों में रख लो,
रख दो मेरे सीर पर,
अपने ये दोनों हाथ,
हम आए गए पूरी में,
ओ मेरे दीनानाथ।।
तुम हो जगत के स्वामी,
ओ मेरे जगन्नाथ,
हम आए गए पूरी में,
ओ मेरे दीनानाथ।।
Singer – Ashutoshanand Ji Maharaj
Writer / Upload – Lucky Shukla
9509400214








