राखो मेरी लाज सभा के बीच,
पवनसुत अंजनी के लाला,
अंजनी के लाला,
पवनसुत अंजनी के लाला।।
धूप दीप से करूं आरती,
गले में फूलों की माला,
पवनसुत अंजनी के लाला,
अंजनी के लाला,
पवनसुत अंजनी के लाला।।
लड्डू को मैं भोग लगाऊ,
चढ़ाऊ सिंदुरी चोला,
पवनसुत अंजनी के लाला,
अंजनी के लाला,
पवनसुत अंजनी के लाला।।
राखो मेरी लाज सभा के बीच,
पवनसुत अंजनी के लाला,
अंजनी के लाला,
पवनसुत अंजनी के लाला।।
स्वर – विजय व्यास जी महाराज।








