मेरी भक्ति का मुझे इनाम मिला,
रात सपने में मुझको श्याम मिला,
रात सपनें मे मुझको श्याम मिला।।
तर्ज – एक मुलाकात जरुरी है।
यूं लगा कि दुआ में असर आ गया,
मेरा श्याम मुझको नज़र आ गया,
मेरे साथ वो मेरे घर आ गया,
मैने बड़े प्यार से बिठाया मेरे श्याम को,
कर सत्कार मैने कहा विश्राम को,
कहा विश्राम को …ओ ओ,
रात सपनें मे मुझको श्याम मिला।।
हाथों में मुरली लिए श्याम थे,
मेरे घर वो आए उतर धाम से,
मेरे पास वो बैठे आराम से,
बड़ा ही निराला मेरे श्याम का मिजाज था,
पहले जो न हुआ कभी ऐसा ये मिलाप था,
ऐसा ये मिलाप था..ओ ओ,
रात सपनें मे मुझको श्याम मिला।।
श्याम के संग मेरी खूब थी बात हुई,
जाने कब दिन बीता जाने ये कब रात हुई,
जो भी दिल ने चाहा श्याम से बोल दिया,
अपने जीवन का राज मैंने प्रभु से खोल दिया,
बिना मांगे मुझको वो सब दे गया,
मगर वो सकूं संग तलब दे गया,
मेरी नींद और चैन सब ले गया,
सोचे कुलदीप जो सपना वो ना टूटता,
श्याम का जो मिला था वो साथ नहीं छूटता,
वो साथ नहीं छूटता ..ओ ओ,
रात सपनें मे मुझको श्याम मिला।।
मेरी भक्ति का मुझे इनाम मिला,
रात सपने में मुझको श्याम मिला,
रात सपनें मे मुझको श्याम मिला।।
गायक – पंकज नामदेव।
प्रेषक – विशाल शर्मा।








