पूज्य श्री की पावन पुनीत ये,
पुण्यतिथि आई,
श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए,
आँखे भर आई,
गुरुदेव जय जय गुरुदेव।।
तर्ज – कस्मे वादे।
श्री प्रताप सागर गुरुराज का,
आज भी पुण्य प्रताप है,
आज भी जीवंत है वो दिलो में,
सासों में चलता जाप है,
आपकी गौरव गाथा,
कभी ना जाये भुलाई,
श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए,
आँखे भर आई,
गुरुदेव जय जय गुरुदेव।।
संघ समाज ये भक्त आपके,
आपका गुणगान करें,
श्री जिन मनोज्ञ सूरी निशदिन,
आपका बस आपका ध्यान धरे,
मुनि नयज्ञ ने दिल में दिलबर,
गुरु की छवि बसाई,
श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए,
आँखे भर आई,
गुरुदेव जय जय गुरुदेव।।
पूज्य श्री की पावन पुनीत ये,
पुण्यतिथि आई,
श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए,
आँखे भर आई,
गुरुदेव जय जय गुरुदेव।।
गायक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








