अवगुण चित ना धरो प्रभु मेरे

अवगुण चित ना धरो प्रभु मेरे

प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो, 

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ||


एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो, 

सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो ||


एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो, 

जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो ||


एक माया एक ब्रह्म कहावत, सुर श्याम झगरो, 

अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो ||

१ टिप्पणी

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