अखियां रे आगे रेवो दिनों रा नाथ निजरो रे नेङा लिरिक्स

जोगन होय मैं जग ढूंढीओ, जोगीड़ो नहीं लाधो जोय, त्रिकुटी महल के गोखड़े, सहज मिलापा होय, अखियां रे आगे रेवो ...

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