मत छोड़ो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे,
बृजनगरी रे कान्हा,
नंदनगरी मत छोड़ो रे।।
मथुरा नगरी में थारो,
मान घणेरो रे,
तड़फ मरेगी ये,
गुजरियां सगरी,
मत छोडो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे।।
बाल गोपाल,
गवाल संग साथी रे,
धोली पीली धेन रोव,
गईयां कजरी,
मत छोडो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे।।
यमुना किनारे दादूर,
मोर पपीहा रे,
कल्प मरे ली कोयल,
श्याम रंग री,
मत छोडो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे।।
बाल पनो बृज,
नगरी में बितयो रे,
बरसाने री राधा संग,
हर डगरी,
मत छोडो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे।।
द्वारका में जाकर कान्हा,
भूल मत जाना रे,
बलवन्त राम थांसूं,
लगन लगरी मत छोड़ो रे,
मत छोडो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे।।
मत छोड़ो रे कन्हैया,
थारी बृजनगरी,
मत छोडो रे,
बृजनगरी रे कान्हा,
नंदनगरी मत छोड़ो रे।।
गायक – समुन्द्र चेलासरी।
मो. – 8107115329
प्रेषक – मनीष कुमार लौट।








