जन्म कल्याणक प्रभु वीर का,
त्रिशला नंदन महावीर का,
ढोल नगाड़े बाजे शहनाईयाँ,
त्रिभुवन में छाई है आज खुशियाँ।।
तर्ज – छोटे छोटे भइयो के।
माँ त्रिशला हरषाई है,
घर घर बांटे बधाई है,
चैत्र शुक्ल की ये तेरस,
शुभ मंगल बेला लाई है,
गूंज रहा जयकारा वीर का,
गूंज रहा जयकारा वीर का,
त्रिशला नंदन महावीर का,
ढोल नगाड़े बाजे शहनाईयाँ,
त्रिभुवन में छाई है आज खुशियाँ।।
राजा सिद्धार्थ के अँगना,
पलने में झूल रहा ललना,
प्यारा सा लागे राजकुँवर,
नजर ना इसको लगा देना,
वर्धमान नाम रखा है वीर का,
वर्धमान नाम रखा है वीर का,
त्रिशला नंदन महावीर का,
ढोल नगाड़े बाजे शहनाईयाँ,
त्रिभुवन में छाई है आज खुशियाँ।।
कुंडलपुर में जन्म लिया,
जन जन का कल्याण किया,
जियो ओर जीने दो का,
हम सबको सन्देश दिया,
“दिलबर” दिवाना जग प्रभु वीर का,
गौरव भी दिवाना प्रभु महावीर का,
जन्मकल्याणक प्रभु वीर का,
त्रिशला नंदन महावीर का।।
“त्रिशला के घर वीर पधारे
गूंज रहे है जय जयकारे
धीर वीर गम्भीर की
जय बोलो महावीर की
हाथ लकड़ियां चंदन की
जय बोलो त्रिशला नंदन की
समता सागर है प्रभु वीर
हरने आये जग की पीर
जय महावीर जय महावीर
प्रेम से बोलो जय महावीर”
जन्म कल्याणक प्रभु वीर का,
त्रिशला नंदन महावीर का,
ढोल नगाड़े बाजे शहनाईयाँ,
त्रिभुवन में छाई है आज खुशियाँ।।
गायक – गौरव कर्णावट जोधपुर।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








