जलवा जमी से है,
केशरिया का आसमा तलक,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
रुतबा केशरिया का,
है जग मे बड़ा,
हर भक्त उनके सामने,
हाथ पसार खड़ा,
निहारे प्रभु को एक टक,
न झपके पलक,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
जैन हो या अजैन सभी को,
प्यारा है ये,
नाथ केशरिया सबका,
सहारा है ये,
कालिया बाबा का पर्चा है,
सबसे अलग,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
केशरिया नाथ से जो भी,
अरदास करे,
दादा उन भक्तो की पूरी,
हर आस करे,
पार करेंगे यही तुझे,
तू विश्वास तो रख,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
तन भी केशरिया है,
मन भी केशरिया,
हुआ है आज नरसा,
रोम रोम केशरिया,
दिल मे केशरिया है,
“दिलबर” है ये तेरा लख,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
जलवा जमी से है,
केशरिया का आसमा तलक,
तरसे दुनिया भी,
ऋषभ प्रभु की देखने झलक।।
गायक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – नरसा दिल से।








