हमारी बार अगर निकले,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
जो कदमों ने तुम्हारे,
तरु शीला केवट उबारे है,
तो अब कलिकाल में करते हो,
क्यों साबित कदम झूठे,
हमारीं बार अगर निकलें,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
सुना है हमने ग्रंथो से की,
तुम अधमो के प्रेमी हो,
बता दो ग्रंथ झूठे है की,
तुम झूठे की हम झूठे,
हमारीं बार अगर निकलें,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
पतित से पतित-पावन का,
मिला क्या खूब जोड़ा है,
ना तुम सच्चो में कम सच्चे,
ना हम झूठो में कम झूठे,
हमारीं बार अगर निकलें,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
हे करुणानिधि करो यदि,
‘बिंदु’ पर करुणा नज़र थोड़ी,
तो सब झगड़ा ही मिट जाए,
ना तुम झूठे ना हम झूठे,
हमारीं बार अगर निकलें,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
हमारी बार अगर निकले,
मदन मोहन सनम झूठे,
तो सरदारी के सारे नाम,
भी कर देंगे हम झूठे।।
स्वर – स्वामी राजेश्वरानंदजी महाराज।
रचना – श्री बिंदु जी महाराज।
प्रेषक – चंदर सिंह सोनानिया।
9977234532








