गुरुदेव दाता भवसागर से तारो,
दोहा – नमो नमो गुरुदेव जी,
अन्तर्काल के बंन्द,
जल दरिया बंन्दन करे,
नमो नमो भगवन।
तपस्या वर्ष हजार की,
सत्संग की पल एक,
तो भी बराबर ना तुले,
मुनी सुखदेव किया विवेक।
बैठ सत्संग के बीच मे,
मै सिंवर लिया जगदीश,
नानूराम सतगुरु मिले,
कहूं चरण निवाकर शीश।
गुरुदेव दाता भवसागर से तारो,
जुगां जुगां में शरणे रेस्यूं,
तन-मन अर्पण सारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
और नही है साथी ईण जुगड़े में,
मै हूं बालक तिहांरो,
गुरु सेवा हर भक्ती झाली,
लोक धन्धो सब कारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
चरण धोय चरणामृत पियो,
धोवो पाप हमारो,
कुबध क्रोध और मान बड़ाई,
दुर परे कर डारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
गुरु बिना नही मार्ग लादे,
घट मे घोर अंधारो,
गुरु बिना जीव निंद में सत्यो,
काल जमांगो चारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
नानकनाथ मिल्या गुरु पुरा,
गिरयो पाप गो भारो,
लादूनाथ संता ग शरणे,
जुग स्यूं लियो किनारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो,
जुगां जुगां मे शरणे रेस्यूं,
तन-मन अर्पण सारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
गुरुदेव दाता भव सागर से तारो,
जुगां जुगां में शरणे रेस्यूं,
तन-मन अर्पण सारो,
गुरुदेव दाता भंवसागर से तारो।।
गायक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








