दीनों के देवता हो,
भव पार तो करा दे,
मुरली बजाने वाले-२,
कोई रास्ता दिखा दे।।
तर्ज – वो दिल कहां से लाऊं।
जर्जर है मेरी हालत,
बैठा शरण तुम्हारी,
धर्मो की राह चलना-२,
सत्कर्म भी सिखा दे,
दीनो के देवता हो,
भव पार तो करा दे।।
मेरे दिल ने तुझको चाहा,
क्या यही मेरी खता है,
अटकी है नाव मेरी-२,
उस पार तू करा दे,
दीनो के देवता हो,
भव पार तो करा दे।।
दीनों के देवता हो,
भव पार तो करा दे,
मुरली बजाने वाले-२,
कोई रास्ता दिखा दे।।
गायक – विद्याकान्त झा।
9931244994
लेखक – सूर्यकांत झा।








