दर्श तेरे जो पाए,
तो कुछ हिम्मत हुई है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
सुना कलिकाल में तो,
बनोगे तुम सहारा,
करोगे रक्षा उसकी,
तुम्हे जिसने पुकारा,
सदा अब दे तो कैसे,
समझ आती नही है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
समझ पाओ तो समझो,
दुखी दर्दी की बातें,
हुआ है चाक सीना,
लगी घातों पे घाते,
दिखाए तुमको कैसे,
नजर आती नही है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
मेरी नादानियो को,
कन्हैया माफ करना,
मैं नैया तू खिवैया,
सोच इंसाफ करना,
सताए हमको ऐसे,
लाज आती नही है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
टपकते आसुंओं से
सुनो मेरी कहानी,
उबारो श्याम मेरे,
कौन तुमसा है दानी,
‘नंदू’ पीड़ा ह्रदय से,
सही जाती नही है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
दर्श तेरे जो पाए,
तो कुछ हिम्मत हुई है,
बताए कैसे तुझको,
जुबां खुलती नही है।।
Singer – Sanjay Mittal Ji
Upload By – Shah Pushti
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