पाखंड में नर क्यों भटका खावे रे लिरिक्स
पाखंड में नर क्यों भटका खावे रे, दोहा - उपकार बडो निज धर्म कहे, तन से मन से धन से...
Read moreDetailsपाखंड में नर क्यों भटका खावे रे, दोहा - उपकार बडो निज धर्म कहे, तन से मन से धन से...
Read moreDetailsआजा खाजा रे दवाई, गुरुजी वैद्य आया। दोहा - टेडे मेडे गोलमोल, सिलावट पाषाण को, विविध प्रकार, धर मूर्ति बनाय...
Read moreDetailsयूँ जन्म सफल हो जावे रे, दोहा - संग सदा करिए तिन को, जिन संग कलंक लगे नहीं कोई, दूर...
Read moreDetailsमानव ऐसी करनी कर रे, पाछे लोग करें गुणगान। दोहा - गुजरान भलो दुख दिन पणे, कर काज अनीति कमावणो...
Read moreDetailsमानव इतना तो कर आके, दोहा - इतिहास बने इस जीवन का, जन जीवन में कुछ तो कर रे, जन...
Read moreDetailsबीरा मत करजे रे अभिमान, पिंजरा टूटेला। दोहा - आया जहां से सेर करने, हे मुसाफिर तू यहां, सेर करके...
Read moreDetailsघायल हो गया रे, शब्दा की लागी ज्ञान कटारी रे। दोहा - माटी कितना दुख सहा, गई कुमार के पास,...
Read moreDetailsओ जी सुगना रा बीर, ओ जी लाछा रा बीर, थाने आनो पड़सी, अर्ज सुनो म्हारी हे धणिया, म्हारी आन...
Read moreDetailsमैं तो रमता जोगी राम, मेरा क्या दुनिया से काम, मैं तो रमता जोगी राम।bd। हाड़ माँस की बनी पुतलिया,...
Read moreDetailsजमे पधारो धणी रोमा, ककू केसर री गार निपाऊ, मोतियों रो सोक पुराउ, पीले पोनो री जाजम ढलाऊ, जीण पर...
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