संध्या ओ आरती सुमिरन होवे लिरिक्स
संध्या ओ आरती सुमिरन होवे, दोहा - संध्या सुमिरण आरती, भजन भरोसे दास, मनसा वाचा कर्मणा, होत विघ्न को नास।...
Read moreDetailsसंध्या ओ आरती सुमिरन होवे, दोहा - संध्या सुमिरण आरती, भजन भरोसे दास, मनसा वाचा कर्मणा, होत विघ्न को नास।...
Read moreDetailsमहिमा भारी तिलक की, को कर सके बखान, आप तिलक को मानिये, श्री विष्णू भगवान।। जिसके माथे पर तिलक, की...
Read moreDetailsभक्त का सत लेवे भगवान, श्री कृष्ण करे अजमान।। चलत - बोले अर्जुन नामी, तेरा भक्त बताओ नामी, मुजे आवे...
Read moreDetailsचांदी का रथड़ा में प्यारो, लागे म्हारो सेठ सावरियो, लागे म्हारो सेठ सावरियो रे, लागे म्हारो सेठ सावरियो।। गोकुल माही...
Read moreDetailsसेवा म्हारी मानो जी गणपति देवा, खोलो म्हारा हिरदा रा ताला जी।। जल चढ़ाऊँ देवा नहीं है अछूता, जल ने...
Read moreDetailsदे गई ताली या जवानी, दे गई ताली रे, यो भाडा को मकान, करणो पडसी खाली रे।। आच्यौ खायो आच्यौ...
Read moreDetailsथारा भारत में गाया क्यों कटे, गोवर्धन धारी रे थारा भारत में।। राग - कुचामण। मथुरा में कान्हा जन्म लियो,...
Read moreDetailsसैया सतगुरु मन भाया जी, कृपा करी गुरुदेव ने, दर्शन पाया जी।। सोता जीव अज्ञान दशा में, गुरु जी आई...
Read moreDetailsसैया सतगुरु भल आया जी, कर हर गाज्यो इन शहर में, आनंद बरसाया ऐ।। दर्द मिटायो इन जीव रो, तन...
Read moreDetailsपांच नाग पकड़ कर लाया, प्रकट खेल रचाया, हेली जोगी जग में आया।। सत री संगत महापुरुष की लाया, खीलन...
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