इक काँधे पे लखन विराजे दूजे पर रघुवीर भजन लिरिक्स
इक काँधे पे लखन विराजे दूजे पर रघुवीर, वीर बलि महावीर हरी तुमने भक्तों की पीर, सिया राम के भजन...
Read moreDetailsइक काँधे पे लखन विराजे दूजे पर रघुवीर, वीर बलि महावीर हरी तुमने भक्तों की पीर, सिया राम के भजन...
Read moreDetailsमाँ वीणा पाणी हो, विद्या वरदानी हो, मेहरो वाली हो, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, अपने भक्तो...
Read moreDetailsबस यही लिख दे माँ लिख दे, तक़दीर में मेरी, ऐ माँ मैं रहूँ सदा सेवा में तेरी।। शाम सवेरे...
Read moreDetailsजयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो लगवाई के, मैया को ओढ़ाउंगी, द्वारे पे जाइके।।...
Read moreDetailsहे मारुती सारी राम कथा का, सार तुम्हारी आँखों में, हे मारुती सारी रामकथा का, सार तुम्हारी आँखों में, दुनिया...
Read moreDetailsकाम होगा वही जिसे चाहोगे राम, अपने स्वामी को, अपने स्वामी को सेवक क्या समझाएगा।। सागर में तेर रहे पत्थर...
Read moreDetailsमाँ मुराद कर पूरी आस रहे ना अधूरी, तेरे दर से जाऊंगा झोली भर के, शेरोवाली माता देख ले, आया...
Read moreDetailsमेरे कंठ बसो महारानी, ना मैं जानू पूजा तेरी, ना मैं जानू महिमा तेरी, मैं मूरख अज्ञानी, मेरे कंठ बसो...
Read moreDetailsतू जो दया ज़रा सी करदे, सर पे हाथ मेरे माँ धर दे। श्लोक - तेरे दरबार का पाने नज़ारा,...
Read moreDetailsतेरा भवन सजा जिन फूलों से, उन फूलों की महिमा खास है माँ, बड़ा गर्व है उनको किस्मत पर, तेरा...
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