आज तेरे दरबार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं।।
मजबूरी गर ना होती तो,
मैं नहीं आता मैं नहीं आता,
दिन और रात तेरा दरवाजा,
मैं नहीं खूड़काता,
पड़ी वक्त की मार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं।।
पहले तो सोचा खुद ही,
नैया संभालू नैया संभालू,
इस मझधार में फंसी ये नैया,
खुद ही पार लगा लू,
करता हूं स्वीकार,
हार मजधार से आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं।।
कहता ‘पवन’ के तुम ही बताओ,
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां मैं,
ठोकर खाते खाते बाबा,
आया हूं यहां मैं,
जाऊं किसके द्वार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं।।
आज तेरे दरबार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं।।
Singer – Mukesh Bagda Ji








