जब अंत घड़ी आए,
कुछ ऐसा नजारा हो,
धरती हो खाटू की,
दीदार तुम्हारा हो।।
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
आखिर के कुछ पल तो,
तेरे साथ बिता पाऊं,
कुछ तेरी सुनकर के,
कुछ अपनी सुना पाऊं,
मुस्कान हो चेहरे पे,
धरती हो खाटू की,
दीदार तुम्हारा हो।।
जब साँसे थम जाए,
और धीमी हो धड़कन,
तेरी गोद का तकिया हो,
तेरी चौखट पे हो तन,
उस वक़्त भी होंठो पे,
बस नाम तुम्हारा हो,
धरती हो खाटू की,
दीदार तुम्हारा हो।।
ख्वाहिश ये मेरी बाबा,
तुम पूरी कर देना,
जब आँखे बंद करुँ,
बाहों में भर लेना,
“जीतू“ वो धाम मिले,
जहाँ चरण तुम्हारा हो,
धरती हो खाटू की,
दीदार तुम्हारा हो।।
जब अंत घड़ी आए,
कुछ ऐसा नजारा हो,
धरती हो खाटू की,
दीदार तुम्हारा हो।।
🎤 Singer – Sourav Sharma Jaipur
✍️ Lyrics – Jayant Sarda ‘Jitu’








