देखो जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई,
सज धज के बैठे रथ में,
सज धज के बैठे रथ में,
एक बहन और दो भाई,
देखों जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई।।
स्वागत को सज गई है,
सारी पूरी नगरिया,
रंग रस बरस रहे है,
रंग रस बरस रहे है,
महकी है पुरवाई,
देखों जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई।।
रथ खींचे नाचे गावे,
प्रभु को सभी रिझावे,
हरि नाम की ‘मधुप’ हरी,
हरि नाम की ‘मधुप’ हरी,
गुंजार दे सुनाई,
देखों जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई।।
देखो जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई,
सज धज के बैठे रथ में,
सज धज के बैठे रथ में,
एक बहन और दो भाई,
देखों जी जगन्नाथ की,
रथ यात्रा है आई।।
स्वर – साध्वी पूर्णिमा दीदी जी।








