जगन्नाथ स्वामी है,
अंतर्यामी है,
जग के पालन हार,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ।।
तर्ज – गोकुल में देखो वृंदावन में देखो।
नीलांचल पर्वत पर तेरा,
सुंदर सा दरबार,
जो भी देखे तेरी छवि को,
हो जाए बलिहार,
दर पे बुलाता है,
संकट मिटाता है,
सबके बारंबार,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ।।
रूप निराला सबसे प्यारा,
चका नैन है प्यारे,
एक बार जो दर्शन करले,
मिट जायें दुख सारे,
हम भी पुकारे और,
तुम भी पुकारो,
सब नाम को बारंबार,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ।।
रथ की शोभा कितनी न्यारी,
देखे दुनिया सारी,
तेरे संग बलभद्र बिराजे,
और सुभद्रा प्यारी,
दर पे बुलाता है,
संकट मिटाता है,
सबके बारंबार,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ।।
जगन्नाथ स्वामी है,
अंतर्यामी है,
जग के पालन हार,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ,
बोलो जय जय जय जगन्नाथ।।
गायक / प्रेषक – राघवेंद्र बृजवासी।
लेखन – राघवेंद्र बृजवासी & अभिराज कुमार।
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देखें – जगन्नाथ चक्का नयन।








