नाथ कैसे द्रोपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
कौरव पांडव मिल आपस में,
जुआं खेल रचाये,
डार कपट का पासा शकुनी,
पांडव राज्य हराए,
नाथ कैसे द्रुपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
द्रुपदसुता को बीच सभा में,
नगन करण को लाए,
द्वारिकानाथ लाज रख मेरी,
तुम बिन कौन सहाए,
नाथ कैसे द्रुपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
दुशासन ने पकड़ केश से,
चीर बदन से हटाए,
खेंचत खेंचत अंत न आयो,
अंबर ढेर लगाए,
नाथ कैसे द्रुपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
भीष्म द्रोण कर्ण दुर्योधन,
सब मन में शरमाए,
‘ब्रम्हानंद’ जिनके हरि पालक,
तिनको कौन दुखाए,
नाथ कैसे द्रुपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
नाथ कैसे द्रोपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए।।
Singer – Ramesh Ji Dadhich
देखें – नजर भर देख ले मुझको।








