कुलदेवी माँ भुवाल,
दोहा – बिरामी नगरी में देखो,
स्वर्णिम अवसर आया,
स्वर्ण जयंती आई भक्तो,
मन सबका हर्षाया।
कुलदेवी माँ भुवाल,
तेरी महिमा अपरम्पार है,
छाजेड़ कुल पे माँ तूने,
किया बड़ा उपकार है,
आई स्वर्ण जयंती आई,
बधाई हो बधाई,
घर घर मे खुशियाँ छाई,
बधाई हो बधाई।।
खेड़ नगर महारानी,
जिनका नाम था भवाल,
धरती से माँ प्रकट हुई,
सब कहने लगे भुवाल,
पुरोहित जी को दर्शन देकर,
किया बड़ा कमाल,
बिरामी नगरी में माँ का मन्दिर,
बन गया विशाल,
आई स्वर्ण जयंती आई,
बधाई हो बधाई,
घर घर मे खुशियाँ छाई,
बधाई हो बधाई।।
संवत दो हजार बत्तीस,
चैत्र शुक्ल की नवमी,
हुई प्रतिस्ठा कुलदेवी की,
धाम बना बिरामी देवी,
देवता सँग विराजे,
प्रसन्न हुई महामाई,
छाजेड़ कुल के भक्तो ने,
माँ की ज्योत जगाई,
आई स्वर्ण जयंती आई,
बधाई हो बधाई,
घर घर मे खुशियाँ छाई,
बधाई हो बधाई।।
स्वर्ण जयंती के आये,
देखो सुनहरे पल,
आओ चले बिरामी धाम,
पल ना जाये निकल,
अखिल भारतीय,
छाजेड़ परिवार का,
ये मण्डल ऐसे खिल रहा है,
“दिलबर” जैसे फूल कमल,
आई स्वर्ण जयंती आई,
बधाई हो बधाई,
घर घर मे खुशियाँ छाई,
बधाई हो बधाई।।
गायक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – ललित र. छाजेड बालोतरा।








