बागा में झूलण गई रे,
सावण गा बड़ा त्यौहार,
मै तो झूल घरां न आई रे,
बाबे रो घोडो त्यार,
बागां में झुलण गई रे।।
अजमल जी द्वारका सिधाया,
अंगने रा भाग जगाया,
रिमझिम तो भादवो बरसे,
बठै काली बादली गरजे,
बठे काली बादली गरजे,
कोयल बोले जयकार,
बागां में झुलण गई रे।।
सावणियों सुरंगो बित्यो,
भादूड़ो मन न भायो,
हिवड़े में मौज घणेरी,
मस्ती में जगत भूलायो,
साचां ग सदां संग सांवरो,
कर देखो रे ईतबार,
बागां में झुलण गई रे।।
बाराजी रो बीरो नारेण भाई आवे,
रिछपाल साथे रघुवीर गावे,
मार्ग में टाबर नाचे,
संगा मे रंग बरसावे,
धरती धोरां वाली खम्मा खम्मा गावे,
पड़े डीजे री झणकार,
बागां में झुलण गई रे।।
बागा में झूलण गई रे,
सावण गा बडा त्यौहार,
मै तो झूल घरां न आई रे,
बाबे रो घोडो त्यार,
बागां में झुलण गई रे।।
गायक – रिछपाल धारीवाल।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








