डमरू बाजे रे डमा डम,
डमरू बाजे रे,
शिव शंकर भोले बाबा,
तेरा डमरू बाजे रे।।
सावन महीने भोले बाबा,
दामिनी दम दमके रे,
कावड़िया दर्शन को आवे,
रिम झिम मेघा बरसे रे,
गणगौर गरजे रे,
घटा गणगौर गरजे रे,
शिव शंकर भोले बाबा,
तेरा डमरू बाजे रे।।
कैलाश रे पर्वत पर बाबा,
रहता ओगड़ दानी रे,
गले भुजंग की माला डाले,
जटा गंग का पानी रे,
चंद्र विराजे रे शीश पर,
चंद्र विराजे रे,
शिव शंकर भोले बाबा,
तेरा डमरू बाजे रे।।
अंग विभूति रमाये बाबा,
ओढ़त है मृगछाला,
जनकल्याण के कारण बाबा,
पी गए विष का प्याला,
नीलकंठ कहाए रे,
भोले नीलकंठ कहाए रे,
शिव शंकर भोले बाबा,
तेरा डमरू बाजे रे।।
डमरू बाजे रे डमा डम,
डमरू बाजे रे,
शिव शंकर भोले बाबा,
तेरा डमरू बाजे रे।।
गायक – देवेंद्र राजपूत।
प्रेषक – शिवम राजपूत।
9893646291








