प्यारा घणा लागो वो सत्संगीयो,
मारे कालजीया की कोर,
कालजीया की कोर मारे,
हिवडा मायला मोर।।
बागा फूलवा गेरी छाया,
कोयल मगन मन मोर,
गूरु मूखी घीयानी करें किलोला,
कई करें झम जोर,
रुपाला लागो रे सत्संगीयो,
मारे कालजीया कि कोर।।
ए अपनी एब आप नी माने,
बिन समजीआ का ढोर,
मेवा त्यागे प्रेम का रे,
खावे खाटा बोर,
रुपाला लागो रे सत्संगीयो,
मारे कालजीया कि कोर।।
ऐ बुरे कर्मौ ने दुर हटावे,
पकड़ भजन कि डोर,
आन ऊपादी काम नहीं आवे,
करो भजन गम गोर,
रुपाला लागो रे सत्संगीयो,
मारे कालजीया कि कोर।।
ऐ लखमीरामजी सतगुरु मीलीया,
सिर माथे का मोड़,
हरी राम जी री विनती रे,
देपावास कि ढोड,
रुपाला लागो रे सत्संगीयो,
मारे कालजीया कि कोर।।
प्यारा घणा लागो वो सत्संगीयो,
मारे कालजीया की कोर,
कालजीया की कोर मारे,
हिवडा मायला मोर।।
गायक – धुल सिंह कडीवाल।
प्रेषक – विक्रम सिंह करमाल।








