मेरी नाथ नैया है,
तेरे हवाले,
डूबा दे या फिर,
डूबने से बचा ले।।
हमें नाथ केवल है,
तेरा सहारा,
लगा दो किनारे या,
कर लो किनारा,
अब तक निभाई नाथ,
और भी निभा लो,
डूबा दे या फिर,
डूबने से बचा ले।।
मुझे डूब जाने का,
कोई गम नहीं है,
मगर पार करना,
क्या धर्म नहीं है,
हसेंगे ये तुझ पे,
संसार वाले,
डूबा दे या फिर,
डूबने से बचा ले।।
लाखों की बिगड़ी,
बनाई ना होती,
तो तेरे दर पे अर्जी,
लगाई ना होती,
‘पहलवान’ होते ना,
लाखों दीवाले,
डूबा दे या फिर,
डूबने से बचा ले।।
मेरी नाथ नैया है,
तेरे हवाले,
डूबा दे या फिर,
डूबने से बचा ले।।
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








