सांवरिया थारी दुनिया में,
भारी कलयुग आयो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
विश्वासा की डोरी टुटी,
रिश्ता नाता भुल्या रे,
काम वासना हावी वेगी,
साचा गेला भुल्या रे,
भाईचारा को काम नहीं रे,
दोस्त धोखो दे गयो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
मोबाइल को भारी धंधो,
सबके भाया छावे रे,
मोबाइल नहीं देवे तो यो,
रोटियां भी ना खावे रे,
भाई भाई के खंजर रोपे,
टिब्बा में यो आयो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
मानपुरा की घटना देखी,
जीवडलो दुख पायों जी,
शर्म ना आई हत्यारी मां,
मन क्यु नी घबरायो जी,
मामुमा के खिला रोप्या,
काल भी गबरायो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
अब तो रोक ले सांवरिया तु,
कलयुग गणों ही बाकी रे,
कई कई ओर दिखासी सांवरा,
बाता गणी ही बाकी रे,
देव शर्मा लिख लिख गावे,
टेम गलत यो आग्यो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
सांवरिया थारी दुनिया में,
भारी कलयुग आयो रे,
माँ की ममता मर गई देखो,
अस्यो जमानों आयो रे।।
गायक & लेखक – देव शर्मा आमा।
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