मेरे मन को बड़ा लुभाता है,
दरबार तेरा झांकीवाले,
दरबार तेरा झांकी वाले,
मेरे बालाजी झांकी वाले।।
मुझे अपनाया तुमने जबसे,
आनन्द में जीवन है तबसे,
प्रभु राम की लगन लगाता है,
दरबार तेरा झांकी वाले,
मेरे बालाजी झांकी वाले।।
मेरे घर परिवार पे किरपा है,
थोड़ी बहुत नहीं इक तरफा है,
मेरे घर का मान बढ़ाता है,
दरबार तेरा झांकी वाले,
मेरे बालाजी झांकी वाले।।
श्रीगंगानगर में धाम तेरा,
चांदी में सजा दरबार तेरा,
सपनों में रवि के आता है,
दरबार तेरा झांकी वाले,
मेरे बालाजी झांकी वाले।।
मेरे मन को बड़ा लुभाता है,
दरबार तेरा झांकीवाले,
दरबार तेरा झांकी वाले,
मेरे बालाजी झांकी वाले।।
लेखक / गायक – रवि शर्मा श्रीगंगानगर।
(7062534590)








