तुम्हारे द्वार आना चाहता हूँ,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
तेरी भोली सी सूरत पे कन्हैया,
मैं सब कुछ हार जाना चाहता हूँ,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
मुझे हरी एक जरा सी आस दे दो,
मैं हाले दिल सुनाना चाहता हूं,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
मेरे सरकार मेरी हट को ना टालो,
बुला लो पास चरणों से लगा लो,
मैं सब कुछ भूल जाना चाहता हूं,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
मैं आया छोड़कर सारा जमाना,
मुझे चरणों में दे दो अब ठिकाना,
यही जीवन बिताना चाहता हूं,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
मुझे हरी एक जरा सी आस दे दो,
मैं हाले दिल सुनना चाहता हूं,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
तुम्हारे द्वार आना चाहता हूँ,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।।
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








