मार दक्कालो आजा म्हारा बाबा,
खीचेयां कि हाँसेया होरी रे,
धणी खीचेयां की हासेयाँ होरी।।
है कमर बंधी र वाक तेज कटारे,
हाथां मे तलवार धणी रे,
म्हारा हाथां मे तलवार धणी।।
है महुगढ महलां माई पुजावे,
जोडी ग्यारह भाई कि र धणी,
जोडी ग्यारह भाईयों कि।।
हे हाथ जोडकर बोलगे जातरी,
आर्जी सुणले म्हारी रे बाबा,
अर्जी सुणले म्हारी रे।।
है आबा मे कांईया देर लगादी,
राणेया नटगी कांई थारी र बाबा,
राणेया नटगी कांई थारी।।
है काई थारा भालां बछट ग्या,
काई महलां मे सोग्यो धणी रे म्हारा,
काई महलों मे सोग्यो धणी।।
है काई घोडो पडग्यो महल म,
काई टागंडे टुटी धणी रे म्हारा,
कांई टागंडे टुटी धणी।।
है काई भालां गमग्यां महल में,
काई तलवारें के जगं लग्यो रे धणी,
कांई तलवारें के जगं लग्यो।।
मार दक्कालो आजा म्हारा बाबा,
खीचेयां कि हाँसेया होरी रे,
धणी खीचेयां की हासेयाँ होरी।।
गायिका – मधुबाला चौहान।
लेखक / प्रेषक – दुर्गेश कटारा।
8769290858








