किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी,
क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे,
नाथ कब तक रहेंगे कड़े एक दिन,
देखकर प्रेम आंसू पिघल जाएंगे।।
शबरी केवट जटायु अहिल्या आदि के,
पास पहुंचे प्रभु त्याग कर के अवध,
ये है घटनाए सच तो भरोसा हमें,
खुद-ब-खुद आप आकर के मिल जाएंगे,
किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी।।
दर्श देने को रघुवर जी आएंगे जब,
हम ना मानेंगे अपनी चलाये बिना,
जाने देंगे ना वापस किसी शर्त पर,
बस कमल पद पकड़कर मचल जाएंगे,
किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी।।
फिर सुनाएंगे खोटी खरी आपको,
और पूछेंगे देरी लगाई कहां,
फिर निवेदन करेंगे ना छोड़ो हमें,
प्रभु की झूठन प्रसादी पे पल जाएंगे,
किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी।।
स्वप्न साकार होगा तभी राम जी,
‘जन’ पे हो जाए थोड़ी कृपा आपकी,
पूर्ण कर दो मनोरथ ये ‘राजेश’ का,
जाने कब प्राण तन से निकल जाएंगे,
किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी।।
किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी,
क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे,
नाथ कब तक रहेंगे कड़े एक दिन,
देखकर प्रेम आंसू पिघल जाएंगे।।
स्वर – पूज्य राजन जी।
रचना – श्री राजेश्वरानंद जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








