घनश्याम तुम्हारे मंदिर में मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ लिरिक्स

घनश्याम तुम्हारे मंदिर में मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ लिरिक्स

घनश्याम तुम्हारे मंदिर में, मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ, वाणी में तनिक मिठास नहीं, पर विनय सुनाने आई हूँ।। मैं देखूं अपने कर्मो को, फिर दया को तेरी करूणा को, ठुकराई हुई मैं दुनिया से, तेरा दर खटकाने आई हूँ, …

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