घणी दूर से दोड़्यो थारी गाडुली के लार भजन लिरिक्स

घणी दूर से दोड़्यो थारी गाडुली के लार भजन लिरिक्स

घणी दूर से दोड़्यो थारी गाडुली के लार, गाड़ी में बिठाले रे बाबा, जाणो है नगर अंजार।। नरसी बोल्यो म्हारे सागे के करसी, ओढ़न कपडा नाही बैठसि यां मरसि, बूढ़ा बैल टूटेड़ी गाडी पैदल जावे हार, गाड़ी में बिठाले रे …

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