मेरी लाज बचाने वाला,
नाकोडा में रहता है,
मेरे होते करे क्यो चिंता,
दादा मुझसे कहता है।।
तर्ज – कसमें वादे प्यार वफ़ा।
जिनको मेने …हो …,
जिनको मेने अपना समझा,
वो अपने पराये हो गये,
अपने जाल में मुझे फ़साकर,
जख्म वो दिल पर दे गये,
उन जख्मो पर ….हो …,
उन जख्मो पर भैरव दादा,
आकर मरहम लगाता है,
मेरी लाज बचानें वाला,
नाकोडा में रहता है।।
जैसे बदलता… हो …,
जैसे बदलता है ये मौसम,
वैसे ही लोग बदलते है,
अपने ही अपनो के सुख से,
मन ही मन में जलते है,
साया बनकर …हो …,
साया बनकर साथ में मेरे,
दादा हरदम चलता है,
मेरी लाज बचानें वाला,
नाकोडा में रहता है।।
कहे अनूप …..हो …,
कहे अनूप अब तुमको दादा,
अपनी बीती बताऊँ मैं,
रही न हिम्मत मुझमें दादा,
तेरा सहारा पाऊँ मैं,
कैसे कहुँ ….हो …,
कैसे कहुँ “दिलबर” में अपना,
रहा न कोई रिश्ता है,
मेरी लाज बचानें वाला,
नाकोडा में रहता है।।
मेरी लाज बचाने वाला,
नाकोडा में रहता है,
मेरे होते करे क्यो चिंता,
दादा मुझसे कहता है।।
गायिका – श्रेया रांका (जैन) भीलवाड़ा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








