मेरे गम से बेखबर गर,
श्री राम आप होंगे,
श्री राम आप होंगे,
मेरे राम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो,
बदनाम आप होंगे।।
मैं राम नाम सुमिरन,
करके सहूंगा दुख तो,
बदनामियों से कैसे,
गुमनाम आप होंगे,
मेरे ग़म से बेख़बर गर,
श्री राम आप होंगे।।
नैनो से प्रेम जल की,
बरसा तभी तो होगी,
घन बनके जब हृदय में,
घनश्याम आप होंगे,
मेरे ग़म से बेख़बर गर,
श्री राम आप होंगे।।
‘राजेश’ है तुम्हारे,
तो उनके दोष गुण के,
आगाज आप होंगे,
अंजाम आप होंगे,
मेरे ग़म से बेख़बर गर,
श्री राम आप होंगे।।
मेरे गम से बेखबर गर,
श्री राम आप होंगे,
श्री राम आप होंगे,
मेरे राम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो,
बदनाम आप होंगे।।
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








