महाकाल के दर का क्या कहना,
दर पे जो दीवाने आते है,
किस्मत से भी ज्यादा मिलता उन्हें,
किस्मत से भी ज्यादा मिलता उन्हें,
झोली जो यहां फैलाते है,
महांकाल के दर का क्या केहना,
दर पे जो दीवाने आते है।।
दिन रात दीवानों की टोली,
दरबार में तेरे आती है,
झुकते है करोड़ों शीश यहां,
उनकी सारी बला टल जाती है,
महांकाल के दर का क्या केहना,
दर पे जो दीवाने आते है।।
झूठी दुनिया ये समझ ना पाया मैं,
रिश्ते दौलत के समझ ना पाया मैं,
जब खुद को अकेला पाया है,
मेरे संग नजर तू आया है,
महांकाल के दर का क्या केहना,
दर पे जो दीवाने आते है।।
अखियां है निराली महाकाल तेरी,
जिस पर तेरी नजर हो जाती है,
ऐसा जादू तुम्हारी अंखियों में,
तकदीरे बदल दी जाती है,
महांकाल के दर का क्या केहना,
दर पे जो दीवाने आते है।।
महाकाल के दर का क्या कहना,
दर पे जो दीवाने आते है,
किस्मत से भी ज्यादा मिलता उन्हें,
किस्मत से भी ज्यादा मिलता उन्हें,
झोली जो यहां फैलाते है,
महांकाल के दर का क्या केहना,
दर पे जो दीवाने आते है।bd।
Lyrics & Singer – Bittu Ji Maharaj








