खमा बावजी हो राज,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपणी,
उबार लेणा भवरा,
राम ने रठे हो जीयारो,
काई करे जमड़ा,
हेजी होजी हा।।
सपनी तो खेवे दाता,
पीयाला मे रेती मे,
पीयाला मे रेती,
पीयाला री बात,
सदा शीव ने केहती,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपनी,
उबार लेणा भवरा।।
सपनी तो खेवे दाता,
भोली ज्यो भाली मे,
भोली ज्यो भाली,
चाल ता पुरूष ने,
लगाओ देवा ढोली,
लगाओ देवा ढोली होजी,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपनी,
उबार लेणा भवरा।।
सपनी तो खेवे दाता,
जमड़ारी दासी मे,
जमड़ारी दासी,
एक हाथ खड़क दुजे रे,
फासी दूजे रे हाथ फासी,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपनी,
उबार लेणा भवरा।।
सपनी तो खेवे दाता,
चार जुग छलीया हो,
चार जुग छलीया,
चार जुगा मू,
गुरू गोरख टलीया,
गोरख टलीया होजी,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपनी,
उबार लेणा भवरा।।
मछीन्दर प्रताप जती गोरख,
बोले दाता गोरख बोले,
मार मार ममता,
हुया हो अवदुता,
हुया हो यवदुता होजी,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपनी,
उबार लेणा भवरा।।
खमा बावजी हो राज,
हेजी होजी हा,
मार लेना सपणी,
उबार लेणा भवरा,
राम ने रठे हो जीयारो,
काई करे जमड़ा,
हेजी होजी हा।।
गायक – गोपाल दास वैष्णव।
लेखक – सिंगर मगनीराम गाडरी।
महुआ भीलवाडा़ ( राज.)
मो. 9680818193








