होली खेले रे सांवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे,
खाटू नगरी रे म्हारे,
श्याम की गली,
होली खेलें रे।।
चंग रा धमीड़ा म्हारे,
बाबा री गली में,
नाचे री लोग लुगायां सगली,
होली खेलें रे,
होली खेलें रे साँवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे।।
लाल गुलाबी नीली पीली,
रंग स्यू भरी है खाटू नगरी,
होली खेलें रे,
होली खेलें रे साँवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे।।
गाल गुलाबी तिरछी नजरा,
मोह पाश में फसाई जबरी,
होली खेलें रे,
होली खेलें रे साँवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे।।
‘शर्मिला सोनी’ थानें अरज लगावे,
थारे ही रंग में रंगीजु सगरी,
होली खेलें रे,
होली खेलें रे साँवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे।।
होली खेले रे सांवरियो,
चालो खाटू नगरी,
होली खेलें रे,
खाटू नगरी रे म्हारे,
श्याम की गली,
होली खेलें रे।।
लिरिक्स – डा़ शर्मिला प्रकाश सोनी।
गायक – नवरत्न पारीक सुजानगढ़।








