मेरे रोम रोम में श्याम,
मगन मैं नाचूँगी,
मुझे दुनिया से क्या काम,
मगन मैं नाचूंगी।।
मैं गिरधर की गिरधर मेरे,
जनम जनम के हो गए फेरे,
मेरा जुड़ गया इनसे नाम,
मगन मैं नाचूंगी।।
मुझे नचावे उसकी मस्ती,
मुझको मिल गई बिलकुल सस्ती,
ना कौड़ी लगा ना दाम,
मगन मैं नाचूंगी।।
जब मोहन की बाजे मुरलिया,
छम छम बाजे मेरी पायलिया,
अब लोग करे बदनाम,
मगन मैं नाचूंगी।।
ऐसी नजर प्रेम की मारी,
सुधबुध भूल मैं मैं सारी,
और भूल गई घर बार,
मगन मैं नाचूंगी।।
मेरे रोम रोम में श्याम,
मगन मैं नाचूँगी,
मुझे दुनिया से क्या काम,
मगन मैं नाचूंगी।।
स्वर – निकुंज कामरा जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








