तेरे भरोसे साँवरे,
चलता ही रहूँगा,
तेरी कृपा की छाँव में,
पलता ही रहूँगा।।
तेरा ही नाम लेके मैं,
हर एक कदम चला,
सुबह भी तेरे नाम से,
और दिन भी है ढला,
उँगली पकड़ के सांवरे,
उँगली पकड़ के सांवरे,
बढ़ता ही रहूँगा,
तेरे भरोसे सांवरे,
चलता ही रहूँगा।।
जब से रखा है सांवरे,
दर पे तेरे कदम,
खुशियों भरी है ज़िंदगी,
मिटने लगे है गम,
सुख हो या दुख हो सांवरे,
सुख हो या दुख हो सांवरे,
हस के सहूँगा,
तेरे भरोसे सांवरे,
चलता ही रहूँगा।।
रखना ‘अनुज’ को सांवरे,
अपनी शरण सदा,
रखोगे जैसे हाल में,
वैसे रहूँ सदा,
तेरी क़सम मैं सांवरे,
तेरी क़सम मैं सांवरे,
कुछ ना कहूँगा,
तेरे भरोसे सांवरे,
चलता ही रहूँगा।।
तेरे भरोसे साँवरे,
चलता ही रहूँगा,
तेरी कृपा की छाँव में,
पलता ही रहूँगा।।
गायक – मास्टर पंचम।
लेखक – अनुज जैन।








