झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर,
धर के भगवो भेष रे,
सुन माही रमतो आयो रे जोगेसर,
करयो मादल जी आदेश रे।।
सहाय करो दादा सिद्ध सोलंकी,
गोमद घर अवतार रे।
मगरियो रल आवणो, सिद्ध बना री ढाणी रे,
खेजड़ रुख सुहावणो।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
चौमासा रे माही आयो रे जोगेसर,
भर भादूड़ा रे माय रे।
दिखण दिशा सूं आयो रे जोगेसर,
उतर दिशा में जाय रे।
मार्ग बहतां ढाणी आई,
जोगी लियो विश्राम रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
हाथ में गुणियो, कांधे नेतरो,
माता गउवा दुहण न जाय रे।
देख जोगी ने गायां चिमकी,
औरत बोल्या अबडा बोल रे।
थाने पीये पेणो पीवणो,
चिमकी बाछड़ियां री माय रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
कंमण्डल झोली बाबे लिया बगल में,
जोगी झपटियो जाय रे।
रैन अंधारी बाबा, मार्ग ना दिसे,
झीर-मीर बरसै मैव रे।
मार्ग भिजे, कमंडल भिजे,
भिजे जटां वालो भेष रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
बिजली रे पलाकेऊं मादल मिलिया,
देख्यो भगवों भेष रे।
गोमदसिंह बाबे रा पैर पकड़िया,
बाबा पाछो ढाणी माहीं हाल रे।
मादल बाबे ने अर्ज गुजारी,
स्यामी सुणो फरियाद रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
ला र ले जन्म रा कांई पाप करयोड़ा,
करणी रो भेद बताय रे।
ना गोमंद र पुत्र, ना पुत्री,
ना कोई आस ओलाद रे।
आज जोगसर म्हारी ढाणी चालो,
सेवा करां दिन-रात रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
जोगी केवे जुगत कर जांचूलो,
बदसी थारो परिवार रे।
थे सरदार सोलंकी कहिज्यो,
नीज पकड़ो नीत नैम रे।
मिट्टी मदिरा रो सेवन मत करज्यो,
पीढ़ी-पीढ़ी में होव देव रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
मनाओ जोगी ने ढाणी ल्याया,
धूणों लगायो बीच उघाड़ रे।
बारह साल तक जोगेसर तपियो,
तपियो छट बारह मास रे।
मादल ऊपर बाबे महर करदी,
दे दी भभूती हाथ रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
मादल भभूती मांगली,
दे दी जोगेसर हाथ रे।
नौवें महीने मादल पोतो होवेला,
नाम भभूतो धराय रे।
शेरसिंह, नरपतसिंह दोय होवेला,
चौथी सिणगारां भैन रे।
वचनां रो बांधयो आयो रे जोगेसर,
राव सोलंकिया री ढाणी रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
जन्म लियो सिद्ध सोलंकिया री ढाणी में,
जाणे चारण वालो गांव रे।
माता भटियाणी रे ओदर उपजिया,
बाई सिणगारां भैण रे।
मादलसिंह रा कहिजे पौतरा,
गोमद घर अवतार रे।
जन्म पतरी आ सिद्धां री भाया,
सुणज्यो ध्यान लगाय रे।
खेमदास कामड़ जस गावें,
हेलो सुणी बेगो आव रे।
सहाय करे दादो सिद्ध सोलकी,
गोमद घर अवतार रे।
मगरियो रल आवणो, सिद्ध रे बना सा री ढाणी,
वो खैजड़ रुख सुहावणो,
हेलो सुणी बेगै आव रे।
झर झर कंथा जूनो रे जोगेसर।।
गायक – सीताराम पंचारिया।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो. – 8107115329








