म्हारा सतगुरु मारियो बाण,
तन विच लागो रे,
तन विच लागो यो तो,
काया विच लागो रे।।
गुप्त बाण गुरा मारियो रे,
यो तो पर घट दिखे नाय,
घायल कर गयो रे,
मारा सतगुरु मारयो बाण,
तन विच लागो रे।।
सतगुरु हेला पाड़िया ओ,
मेरी दी दी रे नींद उड़ाई,
चेतन कर गया हो,
मारा सतगुरु मारयो बाण,
तन विच लागो रे।।
सतगुरु प्याला पाविया ओ,
मारो दी दो रे जहर हटाए,
अमृत पायो ओ,
मारा सतगुरु मारयो बाण,
तन विच लागो रे।।
इंदर गटा जू गुरु गाजिया ओ,
गुरु बरसिया मूसलधार,
हीरा जड़ लागो ओ,
मारा सतगुरु मारयो बाण,
तन विच लागो रे।।
देवनाथ गुरु भेटिया ओ,
राजा मानसिंह यश गाय,
कोई नर जागे रे,
मारा सतगुरु मारयो बाण,
तन विच लागो रे।।
म्हारा सतगुरु मारियो बाण,
तन विच लागो रे,
तन विच लागो यो तो,
काया विच लागो रे।।
गायक – भेरुपुरी जी गोस्वामी।
प्रेषक – सम्पत पुरी गोस्वामी देवरी मठ।
8000468275








