मने रुणिजे ले चालो जी,
देखुली मैं भी मेलो,
डीजे प घुमर खाऊली मैं,
ओढ़ लुगडो पीलो।।
दूर दूर से घणा यात्री,
दरसण करबा आवे,
झांकी माही डिजे बाजे,
नाचें घुमर खावे,
डिजे प घूमर खाऊली मैं,
ओढ़ लुगडो पीलो।।
जगह जगह भण्डारा लागे,
खूब खिलावे खाणो,
कोई खिलावे सीरो पुडी,
कोई जिमावे दाणो,
बांट छः बिस्कुट कैलो जी,
देखुली मैं भी मेलो।।
रुपया टका कोन हाथा में,
काको मैले जाबो,
रुणिजा में भरया खजाना,
देसी म्हारो बाबो,
निर्धन को हैलो सुणज्यो जी,
देखुली मैं भी मेलो।।
भीड़ पड़े भक्ता रे माही,
कुण वाने सभाले,
लिले चढ़कर आवे बाबो,
सबने देखे भाले,
भक्ता के रहवे भैलो जी,
देखुली मैं भी मेलो।।
दरसण दे रूणिजे वाला,
भाग म्हारा खुल जावे,
रमेश प्रजापत टोंक वालों,
थाकी महिमा गावे,
म्हारी ओर कदया देखेलो रे,
देखुली मैं भी मेलो।।
मने रुणिजे ले चालो जी,
देखुली मैं भी मेलो,
डीजे प घुमर खाऊली मैं,
ओढ़ लुगडो पीलो।।
Singer / Lyrics – रमेश प्रजापत टोंक।








