घुमा दे तेरी मोरछड़ी,
मोर छड़ी रे तेरी मोर छड़ी,
म्हाने गोदया में बिठाके बाबा श्याम,
घुमा दे तेरी मोरछड़ी।।
तेरी मोरछड़ी का झाड़ा,
जिसको लग जाता है,
जन्म मरण से मुक्ति पाकर,
भव से तर जाता है,
उसको मिल जाता बैकुंठ धाम,
घुमा दे तेरी मोर छड़ी।।
मोर छड़ी के झाडे ने,
मंदिर का पट खुलवाया,
बिन चाबी ताले को खोलकर,
चमत्कार दिखलाया,
थाने झुक झुक करूं प्रणाम,
घुमा दे तेरी मोर छड़ी।।
जब तेरी मोर छड़ी लहरावे,
रोम रोम खिल जावे,
ऐसा जादू कर देती वो,
तेरा ही हो जावे,
एक बार मुझ पर फिरा दे जपु नाम,
घुमा दे तेरी मोर छड़ी।।
सुनील शर्मा ढिंगरिया ने,
पूरा है विश्वास तेरा,
मत ठुकराना मेरी बात को,
तुझ पर है मेरा डेरा,
मेरे जीवन में कर दे आराम,
घुमा दे तेरी मोर छड़ी।।
मोर छड़ी रे तेरी मोर छड़ी,
म्हाने गोदया में बिठाके बाबा श्याम,
घुमा दे तेरी मोरछड़ी।।
गायक – सुनील शर्मा।
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