थोड़ी पलका नै उघाड़ो बाबा श्याम भगत थां रै द्वार खड़्यो

थोड़ी पलका नै उघाड़ो बाबा श्याम भगत थां रै द्वार खड़्यो

थोड़ी पलका नै उघाड़ो बाबा श्याम, भगत थां रै द्वार खड़्यो।। तर्ज – थे तो आरोगो नी मदन गोपाल। अपणो जाण कै थां नै बाबा, थां की शरणां आयो, लाखां नै थे गळै लगाया, मन्नै क्यूं बिसरायो, एकर देखो म्हां …

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