गौसाई जागो जुग माई आसन्न अधर बिराजे सायल लीरिक्स

गौसाई जागो जुग माई आसन्न अधर बिराजे सायल लीरिक्स

गौसाई जागो जुग माई, आसन्न अधर बिराजे, मेहर करो थे मोटा ठाकर, तो सेवकों ने स्याम निवाज़े।। आदू धाम कड़ेल थरपना, दरगां धणी बिराजे, झुंझालो जीवों रो ठाकुर, उठे प्रजा नीवे जुग पूजे।। ध्वलीगढ़ गिरवरो गढ़ ऊपर, उठे पाट कलश …

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