तू माँ शहंशाहो की शहंशाह मैं गरीबो से भी गरीब हूँ भजन लिरिक्स

तू माँ शहंशाहो की शहंशाह मैं गरीबो से भी गरीब हूँ भजन लिरिक्स
दुर्गा माँ भजनलक्खा जी भजन
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तू माँ शहंशाहो की शहंशाह,
मैं गरीबो से भी गरीब हूँ,
तेरे हाथो ने लिखी किस्मतें,
जो ना बन सका मैं नसीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



तेरा हर जुबां पे है जिक्र माँ,

तुझे हर भगत की है फिक्र माँ,
क्यों मुझि पे नजर करम नहीं,
क्या तेरे लिए मैं रकीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



ख़ुशी खुशनसीबों में बट गई,

रोते जिंदगी मेरी कट गई,
दे दी सबको भीख हेयात की,
पड़ा मौत के मै करीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



मुझे चारागर के पास भी,

ना दवा मिली ना दुआ मिली,
मेरे दर्द से तू है बेखबर,
या मरीज मैं ही अजीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



तेरा बेटा मैं और तू है माँ,

ना हूँ मैं अलग और ना है तू जुदा,
निर्दोष माँ तेरे होते भी,
क्यों चढ़ गया मैं सलीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



तू माँ शहंशाहो की शहंशाह,

मैं गरीबो से भी गरीब हूँ,
तेरे हाथो ने लिखी किस्मतें,
जो ना बन सका मैं नसीब हूँ,
तू माँ शहंशाहो की शहंशाह।।



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