मेरे दिन बंधू भगवान रे गरुड़ पर चढ़कर आ जाना कमल किशोर जी नागर

मेरे दिन बंधू भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।



मेरी साँस चले ना पावा,

ना जिव्हा चले ना गाना,
मेरा जिव चले भगवान तो तुम,
शिव जी बनकर आ जाना,
मेरे दिन बंधु भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।



गुजरू जब में गुलजारी,

ये दुनिया रहे ना सारी,
गुजरू जब में गुरुदेव तो तुम,
सतगुरु बनकर आ जाना,
मेरे दिन बंधु भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।



चलने की हो तैयारी,

तब घोडा मिले ना गाड़ी,
मेरी शैया छूटे घनश्याम तो तुम,
नैया लेकर आ जाना,
मेरे दिन बंधू भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।



यमदूत बनाये बंदी,

और काया होगी गन्दी,
जब जाऊँ में शमशाम तो तुम,
नंदी लेकर आ जाना,
मेरे दिन बंधु भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।



जब आये मरण का मौका,

कही हो ना जाये धोका,
मेरे ज्ञान के दाता गुरुदेव रे तुम,
कोई नौका लेकर आ जाना,
मेरे दिन बंधु भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।


3 टिप्पणी

  1. टिप्पणी बहुत बहुत अच्छा लगा मे तो आपका शिष्य हु गुरु जी आपको पृणाम और जय Shri krisna

  2. Ver

    Bhut bhut achha lga ab hme vo bhjan nhi mil rha h
    जटा मुकुट में गंगा बिराजे चंदमा उनके मुख ऊपर ………….

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