गुरू मुरारी ने मैं करदी मालो माल हरियाणवी भजन

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गुरू मुरारी ने मैं करदी मालो माल हरियाणवी भजन

गुरू मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



सुपने में प्रतिदिन आवः,

सुपने में प्रतिदिन आवः,
आ क मन्नै वो समझावः,
हो री सुँ खुश हाल,
गूरु मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



सास नन्द ताने मारं सं,

सास नन्द ताने मारं सं,
कह क बांझ मन्नै पुकारं सं,
गुरू ने दे दिया लाल,
गूरु मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



आए साल मैं दर प जाऊँ,

आए साल मैं दर प जाऊँ,
भण्डारा जगराता कराऊँ,
ले क गुरू का नाम,
गूरु मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



धज्जा नारियल लाल लंगोटा,

धज्जा नारियल लाल लंगोटा,
लया राखया गुरूआं का सोटा,
लयाई चोला लाल,
गूरु मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



अर्जुन स्वामी का मानुँगी स्यान,

अर्जुन स्वामी का मानुँगी स्यान,
दिखा दिया समचाणा धाम,
गुरू करः कमाल,
गूरु मुरारी ने,
मैं करदी मालो माल।।



गुरू मुरारी ने,

मैं करदी मालो माल।।

प्रेषक – राकेश कुमार खरक जाटान
9992976579


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